ग्रंथसार
उपनिषदों का विस्तार केवल ग्रंथों का संग्रह नहीं, बल्कि अनंत आत्म-बोध की ओर ले जाने वाला एक महा-प्रांगण है।
सामान्य वेदान्त उपनिषद् · पाठ 1
उपनिषदों का विस्तृत प्रांगण