ग्रंथसार
वेदान्त का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान का अर्जन नहीं, अपितु स्वयं के वास्तविक स्वरूप की प्रत्यक्ष उपलब्धि है।
सामान्य वेदान्त उपनिषद् · पाठ 2
सामान्य वेदान्त का प्रयोजन