ग्रंथसार
कैवल्य उपनिषद् ब्रह्मज्ञान के उस अद्वितीय मार्ग को खोलती है जहाँ साधक अपनी आत्मा को ही समस्त ब्रह्मांड का आधार अनुभव करने लगता है।
सामान्य वेदान्त उपनिषद् · पाठ 3
कैवल्य उपनिषद्