ग्रंथसार
परम सत्ता के विराट स्वरूप और अंतर्यामी नारायण की उपासना के माध्यम से मोक्ष के मार्ग का अनावरण ही महानारायण उपनिषद् का सार है।
सामान्य वेदान्त उपनिषद् · पाठ 4
महानारायण उपनिषद्