ग्रंथसार
स्वयं के स्वरूप को पहचानने की वह यात्रा, जहाँ जीव अपनी अनंतता का साक्षात्कार करता है।
सामान्य वेदान्त उपनिषद् · पाठ 9
आत्मबोध उपनिषद्