ग्रंथसार
सांसारिक मोह-माया के समस्त बंधनों को छिन्न-भिन्न कर परम शांति की ओर अग्रसर होने की प्रक्रिया ही संन्यास है।
संन्यास उपनिषद् · पाठ 1
त्याग का मार्ग