ग्रंथसार
संसार की भागदौड़ के बीच 'संन्यास' का अर्थ मात्र घर छोड़ना नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपे परम सत्य को पहचानने की वह अनिवार्य यात्रा है जो जीवन को सार्थकता प्रदान करती है।
संन्यास उपनिषद् · पाठ 10
संन्यास उपनिषद् क्यों?