ग्रंथसार
त्याग और आत्मज्ञान के मार्ग पर अग्रसर परिव्राजक के लिए संसार का मोह और बंधन कैसे अर्थहीन हो जाते हैं, इसका जीवंत चित्रण ही नारद परिव्राजक उपनिषद का सार है।
संन्यास उपनिषद् · पाठ 11
नारद परिव्राजक उपनिषद: मुसाफिर की पुकार