ग्रंथसार
अकिंचन भिक्षुक का पात्र केवल एक लकड़ी का पात्र नहीं, बल्कि संसार के समस्त मोह को त्यागकर शून्य में परमात्मा को भरने का एक उपक्रम है।
संन्यास उपनिषद् · पाठ 5
भिक्षुक उपनिषद: एक प्याला और अनंत की प्यास