ग्रंथसार
सांसारिक बंधनों को त्यागकर आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होने का पथ कठोर संकल्प और त्याग की नींव पर टिका होता है।
संन्यास उपनिषद् · पाठ 8
संन्यास उपनिषद: संकल्प का विधान