ग्रंथसार
परम सत्ता का रहस्य केवल शिव के अस्तित्व में ही निहित है, जो समस्त सृष्टि के आदि, मध्य और अंत के साक्षी हैं।
शैव उपनिषद् · पाठ 1
शिव ही परब्रह्म