ग्रंथसार
निराकार ब्रह्म की अगम्यता और उसे नाम व रूप के माध्यम से अनुभव करने की जिज्ञासा का एक आध्यात्मिक संवाद।
शैव उपनिषद् · पाठ 12
निराकार का साकार नाम