ग्रंथसार
काल के प्रवाह और विनाश के रहस्यों के बीच भस्म की महिमा और शिव स्वरूप का साक्षात्कार ही इस उपनिषद का केंद्र है।
शैव उपनिषद् · पाठ 6
बृहज्जाबाल