ग्रंथसार
काल की अनित्यता को भस्म की पवित्रता में समाहित कर शाश्वत शिवत्व को प्राप्त करने का मार्ग ही भस्म जाबाल है।
शैव उपनिषद् · पाठ 7
भस्म जाबाल