ग्रंथसार
सृष्टि के कण-कण में समाहित उस पंचम मुखी परमेश्वर के स्वरूप का बोध ही मोक्ष का मार्ग है।
शैव उपनिषद् · पाठ 8
पञ्चब्रह्म उपनिषद