ग्रंथसार
शक्ति की उपासना केवल बाह्य कर्मकांड नहीं, अपितु अंतःकरण के अनुशासन और पूर्ण समर्पण की एक सूक्ष्म साधना है।
शाक्त उपनिषद् · पाठ 11
शाक्त मार्ग की अनुशासनबद्धता