ग्रंथसार
आदि शक्ति ही ब्रह्मांड की एकमात्र अधिष्ठात्री और समस्त अस्तित्व का मूल कारण है।
शाक्त उपनिषद् · पाठ 4
बह्वृच उपनिषद