ग्रंथसार
भगवती सौभाग्यलक्ष्मी की महिमा और उनके स्वरूप में विलीन होने का मार्ग ही परम ऐश्वर्य है।
शाक्त उपनिषद् · पाठ 6
सौभाग्यलक्ष्मी उपनिषद