ग्रंथसार
सीता के दिव्य स्वरूप का उद्घाटन और उनकी परम शक्ति का रहस्योद्घाटन ही इस उपनिषद का मूल है।
शाक्त उपनिषद् · पाठ 7
सीता उपनिषद