ग्रंथसार
भक्ति की कोमल सरिता और ज्ञान की प्रखर ज्योति जब एक ही हृदय में मिलती हैं, तो जीव को परम पद की प्राप्ति होती है।
वैष्णव उपनिषद् · पाठ 12
भक्ति और ज्ञान का समन्वय