ग्रंथसार
नारायण तत्व की सर्वव्यापकता और उनकी उपासना के रहस्यमयी स्वरूप को उद्घाटित करती यह यात्रा सृष्टि के मूल स्रोत से एकाकार होने का मार्ग प्रशस्त करती है।
वैष्णव उपनिषद् · पाठ 2
नारायण उपनिषद् और महानारायण धारा