ग्रंथसार
नृसिंह के दिव्य रूप और उनके महामंत्र में समाहित सृष्टि के रहस्य का उद्घाटन इस उपनिषद का मुख्य आधार है।
वैष्णव उपनिषद् · पाठ 3
नृसिंह तापनीय उपनिषद्