ग्रंथसार
श्रीराम की अनंत महिमा और उनके तापनिय स्वरूप में निहित सृष्टि के गूढ़ रहस्यों का साक्षात्कार।
वैष्णव उपनिषद् · पाठ 4
राम तापनीय उपनिषद्