ग्रंथसार
गोलोक धाम के अधिपति श्रीकृष्ण के स्वरूप और उनके दिव्य मंत्र की महिमा का अलौकिक दर्शन कराता है यह उपनिषद।
वैष्णव उपनिषद् · पाठ 6
गोपाल तापनीय उपनिषद्