ग्रंथसार
वेदांत की उच्च दार्शनिक भूमि पर योग की साधना का अवतरण ही इन उपनिषदों की मूल आत्मा है।
योग उपनिषद् · पाठ 1
योग-उपनिषदों का स्वरूप