ग्रंथसार
सुषुम्ना के भीतर सोई हुई कुण्डलिनी को जगाकर उसे उर्ध्वगामी बनाने की सूक्ष्म प्रक्रिया ही आत्म-साक्षात्कार का मार्ग है।
योग उपनिषद् · पाठ 3
योगकुण्डलिनी और मेरुदंड की साधना