ग्रंथसार
ध्वनि की सूक्ष्म तरंगों में लीन होकर ही साधक उस परम बिंदु को प्राप्त करता है जहाँ शब्द मौन में विलीन हो जाते हैं।
योग उपनिषद् · पाठ 7
नादबिन्दु उपनिषद: ध्वनि का रहस्य