ग्रंथसार
अहंकार और देह के बंधनों को तोड़कर, श्वास की लय में छिपे उस परमहंस का साक्षात्कार ही आत्म-साधना का परम लक्ष्य है।
योग उपनिषद् · पाठ 9
हंस उपनिषद: आत्मा का हंस