ग्रंथसार
सत्य केवल सच बोलना नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को यथार्थ के साथ एकाकार कर लेना है।
अहिंसा और सत्य · पाठ 2
सत्य: प्रकाश की ज्योति