ग्रंथसार
संयम का अर्थ दमन नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा को सही दिशा में प्रवाहित करना है।
अहिंसा और सत्य · पाठ 5
ब्रह्मचर्य: संयम की ऊर्जा