ग्रंथसार
तेरहवीं पर जब किसी शोकग्रस्त घर में भोजन परोसा जाता है, तो उस थाली के साथ स्मृति, कृतज्ञता और जीवन की ओर लौटने का एक शांत भाव भी जुड़ा होता है।
गरुड़ पुराण: मृत्यु के बाद और श्राद्ध-कर्म · पाठ 6
तेरहवीं का अर्थ