ग्रंथसार
अश्वत्थ वृक्ष के दृष्टांत से संसार की माया और पुरुषोत्तम के स्वरूप का दिव्य विश्लेषण।
भगवद्गीता · अध्याय 15
पुरुषोत्तमयोग