ग्रंथसार
परमात्मा के रहस्यमय स्वरूप और भक्ति की सर्वोपरि शक्ति का हृदयस्पर्शी उद्बोधन।
भगवद्गीता · अध्याय 9
राजविद्याराजगुह्ययोग