ग्रंथसार
घर की देहरी पर जलता हुआ दीपक केवल रोशनी नहीं, बल्कि उन संस्कारों की निरंतरता है जिन्हें स्त्रियां सदियों से सहेजती आई हैं।
नारी चरित्र · पाठ 10
गृह-संस्कार और स्त्रियां: परंपरा की रक्षक