ग्रंथसार
सावित्री की कथा परंपरा में उस अटूट संकल्प का प्रतीक है जो मृत्यु जैसी अनिवार्य शक्ति को भी संवाद की मेज पर बुला लेने की सामर्थ्य रखता है।
नारी चरित्र · पाठ 2
सावित्री और संकल्प