ग्रंथसार
राजा का गौरव उसकी तलवार की धार में नहीं, बल्कि उसके न्याय के तराजू के संतुलन में निहित होता है।
राजा और राजर्षि · पाठ 12
धर्म का शाश्वत आह्वान