ग्रंथसार
महान कार्य केवल साहस से नहीं, बल्कि दशकों तक निरंतर चलने वाले अटूट धैर्य और ध्येय-निष्ठा से पूर्ण होते हैं।
राजा और राजर्षि · पाठ 3
भागीरथ और संकल्प की धैर्य यात्रा