ग्रंथसार
राजा दशरथ का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि सिंहासन से बड़ा मूल्य सत्य और वचन का होता है।
राजा और राजर्षि · पाठ 5
दशरथ और वचन का गम्भीर भार