ग्रंथसार
क्या वह संसार जिसे हम अपनी आँखों से देख रहे हैं, मात्र एक छाया है जो सत्य के प्रकाश में विलीन हो जाती है?
अद्वैत वेदान्त · पाठ 10
माया का स्वरूप