ग्रंथसार
क्या वह संसार जिसे हम अपनी आँखों से देख रहे हैं, वास्तव में वैसा ही है जैसा प्रतीत होता है, या इसके पीछे कोई गहरी माया छिपी है?
अद्वैत वेदान्त · पाठ 13
अध्यारोप और अपवाद