ग्रंथसार
क्या अद्वैत की साधना केवल एकांत में संभव है, या संसार के कोलाहल के बीच भी आत्म-बोध का प्रकाश पाया जा सकता है?
अद्वैत वेदान्त · पाठ 15
विवेक और वैराग्य