ग्रंथसार
क्या वह जो हमें दिखाई दे रहा है, वही परम सत्य है, या हमारी आँखें किसी गहरे भ्रम के अधीन हैं?
अद्वैत वेदान्त · पाठ 2
भ्रम का स्वरूप