ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि जो आप हर पल अनुभव करते हैं, उसके पीछे वह कौन है जो कभी नहीं बदलता?
अद्वैत वेदान्त · पाठ 3
चेतना की तीन अवस्थाएँ