ग्रंथसार
क्या सत्य को जानने के लिए गुरु की अनिवार्यता मात्र एक परम्परा है या स्वयं के स्वरूप को पहचानने का अनिवार्य सोपान?
अद्वैत वेदान्त · पाठ 7
गुरु की भूमिका