ग्रंथसार
क्या चंचल मन की लहरों को शांत कर सत्य का दर्शन संभव है? आइए, आचार्य और उनके शिष्य देवरात के इस संवाद में ध्यान की गहराई को समझते हैं।
बौद्ध दर्शन · पाठ 12
शमथ और विपश्यना: मन की स्थिरता और अंतर्दृष्टि