ग्रंथसार
क्या जीवन के अनिवार्य दुःख को समझना अंत है, या एक नई और शांत शुरुआत की पहली सीढ़ी?
बौद्ध दर्शन · पाठ 14
दुःख का स्वरूप: जीवन की वास्तविकता