ग्रंथसार
जीवन के झंझावातों के बीच जब मन अशांत होता है, तब आचार्य के शब्द ही एकमात्र प्रकाश-स्तंभ का कार्य करते हैं।
बौद्ध दर्शन · पाठ 6
चार आर्य सत्य