ग्रंथसार
क्या आत्मा की शून्यता के बीच भी कर्मों का फल जीवित रहता है? आइए, इस रहस्यात्मक सत्य को एक गुरु-शिष्य संवाद के माध्यम से समझते हैं।
बौद्ध दर्शन · पाठ 7
कर्म और पुनर्जन्म की प्रक्रिया