ग्रंथसार
क्या ज्ञान स्वयं को ही सिद्ध करता है या उसे किसी अन्य साधन की आवश्यकता होती है?
न्याय दर्शन · पाठ 15
ज्ञान और ज्ञेय का स्वरूप