ग्रंथसार
जब इंद्रियाँ और तर्क मौन हो जाते हैं, तब आप्त-वचन ही प्रकाश स्तंभ बनते हैं।
न्याय दर्शन · पाठ 5
शब्द प्रमाण की महिमा